कविता
नरेन्द्र निर्मल
उम्मीद की किरणों से नया वर्ष फूटा
पेड़ से फ़िर एक पत्ता टूटा
तुम जो चाहो तो पेड़ को पानी पिलाओ
या फ़िर पत्ते बुहारो
टहनिया काटो
कुछ तो करो
की पेड़ को लगे उसे भी चाहता है कोई
नए वर्ष पर ईश्वर से प्रार्थना करो
कि जो आदमी घर से बाहर जाए
वह लौट कर घर आए
अपने परिवार संग दीपावली ,ईद और बैशाखी मनाए
कोई टेलीविज़न उसके मरने की ख़बर नहीं सुनाए
नए वर्ष पर प्रार्थना करो
कि किसी धर्म का कोई नया बाबा
किसी इन्सान को मूर्ख नहीं बनाए
आदमी सिर्फ ईश्वर के आगे सर झुकाये
नया वर्ष
इन्सान के लिए खूबसूरत फूल बन कर आए
कस्तूरी मृग सी खुशबू महकाए
नया वर्ष नई उमंगें लाए
उसमे कई वर्ष और जीने की ललक जगाये
Nice Poem sir..
ReplyDeleteश्री विकास , आप को कविता अच्छी लगी , धन्यवाद . और भी दोस्तों को इस ब्लॉग से जोड़े ...नरेन्द्र निर्मल
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