Sunday, 5 January 2014

नए वर्ष की कविता

 

कविता

नरेन्द्र निर्मल

उम्मीद की किरणों से नया वर्ष फूटा

पेड़ से फ़िर एक पत्ता टूटा

तुम जो चाहो तो पेड़ को पानी पिलाओ

या फ़िर पत्ते बुहारो

टहनिया काटो

कुछ तो करो

की पेड़ को लगे उसे भी चाहता है कोई

 

नए वर्ष पर ईश्वर से प्रार्थना करो

कि जो आदमी घर से बाहर जाए

वह लौट कर घर आए

अपने परिवार संग दीपावली ,ईद और बैशाखी मनाए

कोई टेलीविज़न उसके मरने की ख़बर नहीं सुनाए

 

नए वर्ष पर प्रार्थना करो

कि किसी धर्म का कोई नया बाबा

किसी इन्सान को मूर्ख नहीं बनाए

आदमी सिर्फ ईश्वर के आगे सर झुकाये

 

नया वर्ष

इन्सान के लिए खूबसूरत फूल बन कर आए

कस्तूरी मृग सी खुशबू महकाए

नया वर्ष नई उमंगें लाए

उसमे कई वर्ष और जीने की ललक जगाये

2 comments:

  1. श्री विकास , आप को कविता अच्छी लगी , धन्यवाद . और भी दोस्तों को इस ब्लॉग से जोड़े ...नरेन्द्र निर्मल

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