Tuesday, 14 January 2014
Sunday, 5 January 2014
नए वर्ष की कविता
कविता
नरेन्द्र निर्मल
उम्मीद की किरणों से नया वर्ष फूटा
पेड़ से फ़िर एक पत्ता टूटा
तुम जो चाहो तो पेड़ को पानी पिलाओ
या फ़िर पत्ते बुहारो
टहनिया काटो
कुछ तो करो
की पेड़ को लगे उसे भी चाहता है कोई
नए वर्ष पर ईश्वर से प्रार्थना करो
कि जो आदमी घर से बाहर जाए
वह लौट कर घर आए
अपने परिवार संग दीपावली ,ईद और बैशाखी मनाए
कोई टेलीविज़न उसके मरने की ख़बर नहीं सुनाए
नए वर्ष पर प्रार्थना करो
कि किसी धर्म का कोई नया बाबा
किसी इन्सान को मूर्ख नहीं बनाए
आदमी सिर्फ ईश्वर के आगे सर झुकाये
नया वर्ष
इन्सान के लिए खूबसूरत फूल बन कर आए
कस्तूरी मृग सी खुशबू महकाए
नया वर्ष नई उमंगें लाए
उसमे कई वर्ष और जीने की ललक जगाये
Subscribe to:
Comments (Atom)